डायरी के पन्ने प्रश्नोत्तर

 

डायरी के पन्ने

प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1-  “यह साठ लाख लोगों की तरफ से बोलने वाली एक आवाज है। एक ऐसी आवाज जो किसी संत या कवि की नहीं, बल्कि एक साधारण लड़की की है।” इल्या इहरनबुर्ग की इस टिप्पणी के संदर्भ में ऐन फ्रैंक की डायरी के पठित अंशों पर विचार करें।

उत्तर-

•       नाजियों के हिंसा में लगभग साठ  लाख यहूदी मारे गए थे।

•        एनी फ्रैंक के बारे में-

•       संत न कहने का अर्थ है कि वह आदर्श का प्रस्तुतीकरण  करने वाली  लड़की नहीं थी, न ही कोई दार्शनिक विचारधारा से संबन्धित थी। जो कुछ हो रहा था उसे वह ठीक उसी तरह अपनी समझदारी के हिसाब से प्रस्तुत कर रही थी। 

•       वह कोई कवयित्री भी नहीं थी की बातों को बढ़ा-चढ़ाकर या भावुकतापूर्ण ढंग से प्रस्तुत करना जानती हो।

•       उसने अपनी भावनाओं को प्रस्तुत किया, अपने विचारों को व्यक्त किया। 

•       जो घटनाएं घट रही थी उनका जिक्र किया, जो उसके मन में चल रहा था उनके बारे में बताया और तत्कालीन परिस्थितियों का अपनी समझ से विश्लेषण किया। 

•       इस तरह से वह बहुत साधारण लड़की होते हुए भी असाधारण थी। उसकी इसी साधारण प्रस्तुति ने उसकी डायरी को ऐतिहासिक दस्तावेज़ बना दिया।

•       आज के समय उसकी असाधारणता और बढ़ गई है।

•          प्रश्न 2-

काश कोई होता जो मेरी भावनाओं को गंभीरता से समझ पाता। अफसोस ऐसा व्यक्ति मुझे अब तक नहीं मिला......। क्या आपको लगता है कि ऐन के इस कथन में उसके डायरी लेखन का कारण छिपा   है?

•       माता अथवा बहन से बहुत नहीं पटती थी।

•       गुप्तवास के दौरान साथ में रहने वाली मिसेज वानदान और मिस्टर डसेल  भी अक्सर उसकी आलोचना करते रहते थे।

•       अकेले पीटर से कभी-कभार मन की बात हो जाती थी लेकिन वह भी बड़ी मुश्किल से।

•       इस तरह से ऐन फ्रैंक की बात सुनने वाला कोई नहीं था। 

•       इसलिए उसने अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में डायरी लेखन को चुना।

•       29 मार्च 1944 को उसने लिखा- “कैबिनेट मंत्री मिस्टर वोतके स्टीन ने लंदन में डच प्रसारण में कहा है कि युद्ध के बाद युद्ध का वर्णन करने वाली डायरियों व पत्रों का संग्रह किया जाएगा। मुझे प्रसन्नता है कि जब मैं इस गुप्त एनेक्सी के बारे में छपवाउंगी तो लोग इसे जासूसी कहानी समझेंगे।” 

प्रश्न 3-

•       प्रकृति प्रदत्त प्रजनन शक्ति के उपयोग का अधिकार कि बच्चे पैदा करें या ना करें, अथवा कितने बच्चे पैदा करें, इसकी स्वतंत्रता स्त्री से छीन कर हमारी विश्व व्यवस्था ने न सिर्फ स्त्री को व्यक्तित्व विकास के अनेक अवसरों से वंचित किया है बल्कि जनाधिक्य  की समस्या भी पैदा की है। ऐन की डायरी के 13 जून 1944 को व्यक्त विचारों के संदर्भ में इस कथन का औचित्य ढूंढें।

•       बेशक औरतों के पास प्रजनन शक्ति ईश्वर ने प्रदान की है।  समाज और पुरुषों के द्वारा अक्सर इस मामले में औरतों के ऊपर  बहुत अतार्किक नियम लगा दिए जाते हैं या कभी-कभी ना चाहते हुए भी स्त्रियों को बच्चे पैदा करने के लिए मजबूर किया जाता है ।

•       ऐन फ्रैंक का विचार कि यह अधिकार औरतों के पास सुरक्षित होना चाहिए निश्चित रूप से सही है। नारी को भी उतनी ही स्वतंत्रता प्राप्त होनी चाहिए जितनी पुरुषों को है बल्कि इस मामले में निर्णय लेने का अधिकार पूरी तरह से महिलाओं को प्राप्त होना चाहिए।

•       वह कहती है- “मैं उन लोगों की भर्त्सना करती हूँ जो समाज में औरतों के योगदान को मानने को तैयार नहीं हैं।”  

•       प्रश्न 4-

•              ऐन फ्रैंक की डायरी अगर एक ऐतिहासिक दौर का जीवंत दस्तावेज है तो साथ ही उसके निजी सुख-दुख और भावात्मक उथल-पुथल का भी।  इन पृष्ठों में दोनों का फर्क मिट गया है। इस कथन पर विचार करते हुए अपनी सहमति या असहमति तर्कपूर्वक व्यक्त  करें।  

•       डायरी में ऐन फ्रैंक अपने निजी सुख-दुख व्यक्त करती हैं साथ ही साथ तत्कालीन राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का भी पता चलता है।

•       निजी सुख-दुख के अंतर्गत-

•       जन्मदिन पर प्राप्त होने वाले उपहार। 

•       लोगों की भावनाएं।

•       एक-दूसरे के साथ रिश्ते। 

•       एक-दूसरे के साथ व्यवहार। 

•       मां, पिता व बहन के साथ उसके संबंध। 

•       वानदान परिवार के साथ उनके संबंध। 

•       पिता के मित्रों द्वारा सहायता।

•       निजी अनुभव का रेखांकन।

•       अपनी गुड़िया को अपनी सहेली बनाना तथा डायरी में पत्र के रूप में लिखते हुए उसे संबोधित करना।

•       सामाजिक राजनैतिक-

•       समाज में हो रहे जातिगत और धार्मिक बातों पर अपने विचार व्यक्त करना।

•       राजनीति परिस्थितियों व सामाजिक स्थितियों का जिक्र, जैसे अज्ञातवास में जाने का कारण,

•       जर्मन सैनिकों और खुफिया के लोगों का भय,

•       युद्ध के कारण बिजली, पानी, राशन जैसी मूलभूत चीजों का अभाव,

•       तुर्की द्वारा तटस्थ रहने की बात,

•       प्रश्न-5

•             ऐन ने अपनी डायरी किट्टी, एक निर्जीव गुड़िया को संबोधित चिट्ठी की शक्ल में लिखने की जरूरत क्यों महसूस की होगी?

•       ऐन अपनी बात को एक सहेली को बताना चाहती थी है। 

•       वह सहज रूप से अपनी भावनाओं को व्यक्त करना चाहती है पर उसकी बातों को सुनने वाला कोई नहीं था। 

•       मां और बड़ी बहन से उसकी ठीक से पटती नहीं थी। 

•       पिता के पास समय नहीं था। 

•       वानदान परिवार उसकी नुक्ताचीनी करता रहता था। 

•       उसे अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए एक सहेली की आवश्यकता थी जिसमें जिसको उसने किट्टी के रूप में पाया।  यद्यपि किट्टी  एक गुड़िया है फिर भी वह एक सहेली के रूप में उसे मानकर अपनी सारी चिट्ठियाँ लिखती है।

 अधिक जानकारी के लिए देखें-

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